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As You Think (Hindi Edition)
आत्मबल प्रदान करने वाली सर्वाधिक लोकप्रिय उत्कृष्ट पुस्तक
- Weight
- 0.5 kg
- ISBN / UPC
- 978-93-88677-29-5
- Binding
- Paperback
- Size
- 5.5” X 8.5”
- Pages
- 80
Pairs well with
“‘ऐज़ यू थिंक’ मेरे हाथ में लगभग बीस बरस पहले आई थी,
और तब से यह मेरे साथ ही रहती है, लगातार । जितनी भी पुस्तकें मैने
अब तक पढ़ी हैं उनमें यह पुस्तक सबसे अधिक प्रभावशाली रही है।
इसने मेरा जीवन ही बदल दिया है।”
– इसी पुस्तक में
जेम्स एलन, ‘विज़नरी बिज़नेस’ के लेखक द्वारा लिखित परिचय में से
1904 में, जेम्स एलन नामक एक अप्रसिद्ध से अंग्रेज़ ने एक छोटी सी पुस्तक लिखी थी – ‘ऐज़ ए मैन थिंकैथ’ । यह पुस्तक आत्मविकास के विषय में, बल्कि कहना चाहिए कि आत्मबल के विषय में, विश्व की महानतम पुस्तकों में स्थान पा चुकी है क्योंकि यह पुस्तक हमें केवल यह नहीं बताती है कि सफलता की कुंजियां हमारे ही मन-मस्तिष्क में मौजूद हैं, बल्कि यह भी बताती है कि इनका प्रयोग ऐसी किसी भी ऐसी उपलब्धि का ताला खोलने के लिए कैसे किया जाए जिसे हम हासिल करना चाहते हैं ।
इस संशोधित संस्करण में, मार्क एलन ने उन शब्दों में रद्दोबदल करते हुए इसे संपादित किया है जो अब प्रचलन में नहीं रहे और जो इसके संदेश को अस्पष्ट बना रहे थे। उन्होंने इसके परिचय में बताया है कि इस पुस्तक में बताए गए जीवन-सूत्र किस प्रकार वास्तव में सब के लिए हैं और हर किसी पर लागू होते हैं, भले ही वह किसी भी लिंग, आयु, जाति, धर्म, सामाजिक वर्ग या शैक्षिक स्तर का हो।
‘जैसा आप सोचते हैं’ का संदेश एक सीधा-सरल लेकिन सशक्त अनुस्मारक है जो कि हमें याद दिलाता है कि ‘‘जो उपलब्धि हम हासिल कर लेते हैं, और जो उपलब्धि हम हासिल नहीं कर पाते हैं, वह सीधे-सीधे तौर पर हमारे विचारों का ही परिणाम होता है ।’’
अपनी नियति के नियंता हम स्वयं हैं, अपने भाग्य के निर्माता हम स्वयं हैं।
In 1904, a relatively unknown Englishman named James Allen wrote a little book called As a Man Thinketh. The book has become one of the world’s greatest self-help books – “self-empowerment” is a better term – for it not only reveals to us that the keys to success are within our own minds, it shows us how to use these keys to unlock the greatest fulfillment we can imagine.
In this revised edition, author Marc Allen updates this classic, changing language that has become dated or obsolete, and honing the clarity of the message. He makes As You Think gender inclusive, showing how these principles are truly universal and apply to everyone, regardless of sex, age, race, beliefs, social class, or education.
As You Think book is a simple yet powerful reminder that “all we achieve and all that we fail to achieve is the direct result of our own thoughts.”
We are the masters of our destinies.